बेचदी हया
अब तु बोल कैसे
नारी अबला
तोड़ मर्यादा
दिखा रही बदन
आज की नारी
दिखा आबरू
जीत रही मैडल
मिस बिकनी
जाने कब से
कब लौटेगी सीता
पुछता दिल
किसने कहा
कि करे परित्याग
सिर्फ अबला
बनेंगे राम
आप हम मिलके
किसने रोका
दिखाना तन
तुम्ही बताओ अब
कैसी सभ्यता
बेचदी हया
अब तु बोल कैसे
नारी अबला
प्रस्तुतकर्ता गिरिराज जोशी पर 5:47 अपराह्न
4 टिप्पणियाँ:
लिखते रहेँ
सभी विषयोँ पर,
शुभकामनाएँ!!!
भईया मेरे
स्वागत है आपका
लिखते रहें
आशीष
शुक्रिया करूँ
के दूँ सम्मान, और
लिखुँ हाइकु
आप बताएँ
मैं अपना कर्तव्य
कैसे निभाऊ
गिरिराज जोशी "कविराज"
गिरिराज जी आप जो लिखते हैं अपनी उम्र से बहुत ऊंचा लिखते हैं. छोम्पुतेर और कविता वो भी हायकू.
बहुत शुभ है. शुभाशीर्वद.
महेन्द्र
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