सोमवार, सितंबर 11, 2006

नारी

बेचदी हया
अब तु बोल कैसे
नारी अबला


तोड़ मर्यादा
दिखा रही बदन
आज की नारी

दिखा आबरू
जीत रही मैडल
मिस बिकनी

जाने कब से
कब लौटेगी सीता
पुछता दिल

किसने कहा
कि करे परित्याग
सिर्फ अबला

बनेंगे राम
आप हम मिलके
किसने रोका

दिखाना तन
तुम्ही बताओ अब
कैसी सभ्यता

4 टिप्पणियाँ:

rachana ने कहा…

लिखते रहेँ
सभी विषयोँ पर,
शुभकामनाएँ!!!

आशीष श्रीवास्तव ने कहा…

भईया मेरे
स्वागत है आपका
लिखते रहें

आशीष

गिरिराज जोशी ने कहा…

शुक्रिया करूँ
के दूँ सम्मान, और
लिखुँ हाइकु

आप बताएँ
मैं अपना कर्तव्य
कैसे निभाऊ

गिरिराज जोशी "कविराज"

M.Sinh ने कहा…

गिरिराज जी आप जो लिखते हैं अपनी उम्र से बहुत ऊंचा लिखते हैं. छोम्पुतेर और कविता वो भी हायकू.
बहुत शुभ है. शुभाशीर्वद.
महेन्द्र