पेट में कैंची
भूल गये साहब
हे आरक्षण
दो व दो पांच
सिखाते माड़साब
हे आरक्षण
वोट बैंक को
ललचाते नेताजी
लो आरक्षण
सुनाते जज
आरक्षक को फांसी
हे आरक्षण
चोर डकेत
बन गए सांसद
हे आरक्षण
पेट में कैंची
भूल गये साहब
हे आरक्षण
प्रस्तुतकर्ता गिरिराज जोशी पर 5:41 अपराह्न
1 टिप्पणियाँ:
Your Hykoo, touch my heart , because I'm from Nepal and we are going to make "AraSkhan" for name of Dalit, women and bla bla.... Where we are going in the name of arakskhan.
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